Thursday, April 23, 2009

मेरी बेटी


- dedicated to her daughter Shailja by her mom- प्रोमिला सरस्वती


जो नन्हे हाथ जरा चोट लगने पर
आकर सिमट जाते थे मेरी बाँहों में
पता ही नही चला कब थाम लिया
उन्ही हाथों ने मेरा हाथ
जब में थी अकेली असहाय एस संसर में
पता ही नही चला कब इस मासूम ने
मेरी ज़िनदगी ke कठिन सफर को
हम सफर ban aasaan banna दिया
अपने गगन chumbi buland iradon से
आज मेरी yehही बेटी
घर घर nari shiksha kee
jyot jalane chul pari hai
nari शोषण के virudh
आवाज़ उठाने chal parhi है
मुझे sang ले मेरी buhri haddiyon में भी
kutch कर guzarne kee आस jagane चल pri है
कौन कहता है बेटी bete मैं bhedh होता है
यह to केवल dakiya nusi veecharon का
khel होता है
अपने नाम को saarthak किया
एस SHAIL PUTI neey
हिमालय के adigh विश्वास से
यह to घर घर nari shakti jagane
चल pri है

1 comment:

  1. सुंदर काव्याभिव्यक्ति है. हिन्दी अंग्रेजी में ऊपर आ रही समस्या से निजात आपको हिन्दी कलम से मिल सकती है. http://hindikalam.com/

    ReplyDelete