Thursday, April 22, 2010

And the journey continues..........

How feeble yet how complete
I look for answers
Lived life on both edges
Yet I don’t know what it is
Yet I don’t recall …….any solution
Every moment I become part of the solution
I look for more………..
But the time has elapsed…….my hands are full
I need to empty them. I need to seek more.
I need to reach in to my soul

It has the answers - it has the key
The key to open the treasures of wisdom

The key to the door of truth - the door of reality
The vision has to change ….
The fog will lift and I will see the constant
I have felt it …

A knock, a thump, a jerk..
The fear I carry .the beating of the heart…the jerking of the knee.
My reactions suggest
Suggest to continue…………
It s long dark road……
The light is within
I show the light to some
They laugh and chide
But I relentlessly carry on with the journey
Steps towards reality the incessant journey is unstoppable now….it churns a thousand pages

Sunday, May 17, 2009

हाँ मैंने तेरी चव्वी देखी है

हाँ मैंने तेरी चव्वी देखी है
बगीचे में खिलती कलियों में
एन रंग बिरंगे फूलों में
हवा में झूमते लहराते एन वृक्षो में
मदमस्त हवा के एन झोंको में

हाँ मैंने तेरी चव्वी देखी है
कोयल की कु कु में
पक्षियों के चहकने में
gun gunate झरनों में
सागर में अटखेलियाँ करते लहरों में

हाँ मैंने तेरी चव्वी देखी है
उन नन्हे मुन्ने बच्चों में
जो मेरी आहात सुन
सिमट जातें है मेरी बाँहों में
जिन्होने कभी माँ की चव्वी नही देखी है

कौन कहता है में प्यासी हूँ ?
मेरी आत्मा तृप्त हो गए है
जबसे मैंने जग को अपनाया है
अब कुछ भी नही पराया है

हाँ मैंने तेरी चव्वी देखी है
विशव के कण कण में
- लेखिका प्रोमिला सरस्वती
(dedicated to my daugter shailja)





Wednesday, May 6, 2009

मेरे रब्बा !


ऐ मेरी रूह, तुझे इस शरीर में आकर भी न पाया तो क्या पाया

इस जहाँ से जाने के बाद जन्नत भी मिल जाए तो क्या फायदा

जिस पल मैं तुझसे दूर रहा

वोह पल जो खोये, वोह या तो मेरा रब्बा जानता है, या तू समझता है,

क्या खूब किसी ने फ़रमाया है

की अगर तुम कायानत के एक टुकरे को समझ जाओ

तो सारी कायानत को समझ जाओगे

जो अब मैंने तुझे समझा है, मानो सारी दुनिया तुझमे सिमट आयी हो

अब और क्या गुजारिश करूँ रुब से, ख़ुद वोह तुझ में जो उतर आया है

- शैलजा वोहरा

Wednesday, April 29, 2009

When i go for long walks



this one is dedicated to the moments i spent growing up in our beautiful cottage in the suberm of Shimla which is looking for buyers (anyone interested email shailja22@yahoo.com)




"When I go for long walks"

i go for long walks

hoping never to recede back

i go for walks.........

looking for faces which never look back

sometimes the scene is empty

bearing no witness

to the tears which evaporate

i march ahead

avoiding blank faces as they pass

listening to the shuffling feet going no where

wishing it would suck me into its depths

away from the world

away from the cries

away from the faces

away from the fear

i always return to my space ......

envelop myself in my thoughts

and. laying there awake

i wish i didnt need to walk so far .....

Monday, April 27, 2009

Do you support women empowerment ??

Here is an update from my NGO - Help Social Organisation

We have recently updated our website. We invite you to look at it - http://www.helpsocial.org/
Also we have started a new program for women empowerment.
Support women empowerment: Help Social Organisation is running an educational programme for women in rural areas. Under the two-year programme which is sponsored by the government, women, who could not complete their basic education (matriculation) due to various reasons have been enrolled

What’s special about it: One of the main features of the programme is that the Organisation has selected only women teachers to impart education. These women are well educated but unemployed. Thus through one initiative, the Organisation is serving two purposes – spreading education and providing employment to women. Moreover, the Organisation is paying more than it has been allotted the government for the teachers from own resources and expanding the horizon of the project to school drop out girls also.

How can you contribute: You can sponsor the education of one woman by contributing funds to our programme. The Organisation will use these funds for providing employment to women, empowering women through education and supporting the education of girls who could not complete their education due to poverty in rural areas.

In case you are interested in contributing please call 9810019227.

Regards
Shailja Vohra
Member – HSO. 9810019227
http://www.helpsocial.org/

जरा सोचिये?

जरा सोचिये?

मेट्रिक कक्षा के स्थर पर ड्राप आउट लारकिया यानि वोह लार्कियाँ जो अपनी दसवी कक्षा की prhai पुरी नही कर पाई। कारण कुछ भी हो सकते हैं जैसे असमय शादी हो जाना, गरीबी, जिस कारण पाठशाला ही न जा पाना।
barri खुशी की बात है की हिमाचल प्रदेश सरकार के सहयोग से H.S.O. यानि "Help Social Organisation" ने इस वर्ष २५ लार्कियों को मेट्रिक कक्षा की परीक्षा दिलवानेके साथ साथ अपनी ओर से Vocational Training देने का बीरा भी उठाया है।
H.S.O. संस्था का यह प्रयास बहुत प्र्शंसिया है, चाय की चुस्किया लेते हुए तारीफ़ कह यह शब्द कह कर ही क्या आपका एक सतर्क नागरिक होने का कर्तव्य पुरा हो जाता है ?
ज़रा सोचिये आप, यह, और हम सब भी इस समाज के विभिन् अंग है। आप भी तो इस समाज सेवा के कार्य में किसी न किसी रूप में योग दान दे सकते हैं। आपके munn में यह विचार भी शायद आ रहा होगा, की २५, ३० लार्कियों को परीक्षा दिलवाने से क्या होगा उन्हें वोकेशनल ट्रेनिंग देने से क्या होगा ? होगा यह की येही २५ , ३० महिलायें २५, ३० परिवारों का अंग बनेगी और आर्थिक रूप से स्वावलंबी और परही लिखी महिला आगे चलकर एक होनहार माँ, बेहन, पत्नी या समाज सेविका के रूप में अपना कर्तव्य barri निपुणता से निभा सकतीं हैं। लेकिन केवल २५, ३० महिलाएं ही क्यूँ?
हम आपको येही बताने का प्रयास कर रहे हैं की हम जो जोत जला रहें है उसे आप आगे barha सकते है, अब आप कहेंगे, हम आप से दूर बेठे आपके इस कार्य में कैसे योगदान दे सकतें हैं ? ज़रूर दे सकतें हैं, ज़रूरत है अपने आस पास नज़र डालने की । आप पे इश्वर की असीम कृपया होगी, आप संपन्न परिवार से पैदा हुए होंगे , आपके माँ बाप ने आपको अच्छे संस्कार अच्छा माहोल और ऊँची शिक्षा दी होगी। आप में से के ऊँचे पदों पर कार्यरत होंगे या किसी व्यापर में लगे होंगे । आप में से kaein सेवा निवृत होकर नाती पोतो के साथ अपनी ज़िन्दगी हँसी खुशी बिता रहे होंगे। ज़र्रा सोचिये इतने में ही आप संतुस्थ हैं। रोज़ akhbar में कोई ना कोई ना कोई ख़बर नारी के शोषण को लेके आती है, kahein बल विवाह , kahein अनमेल विवाह, kahien आर्थिक तंगी के कारण शोषण।

kutch बच्चियां जवानी की देहलीज़ पर कदम रखने से पहले ही विधवा की ज़िन्दगी जीने के लिए अपने माँ बाप के घर वापिस आ जाते हैं। माँ बाप का सहारा या कोईआर्थिक आलंबन ना होने के कारन के बार नौबत अत्म्यहत्य तक आ जाती है। जानते हैं एन सब का कारन क्या है ? लार्कियों में पूर्ण शिक्षा का आभाव - जिसके कारन उनमें स्वावलंबन का कोई चारा नही होता। kutch एक को तो माँ बाप का सहारा मिल जाता है , ज्यादातर ऐसे लार्कियाँ सामाजिक शोषण का शिकार हो jaatein हैं।

आप घर बैठे भी हमारे इस प्रयास में अपने योगदान दे सकतें हैं, ज़रूरत है अपनी नज़र अपने आस पास के माहोल पर डालने की। कहीं आपके घर काम करने वाली, अपनी लार्की की purhaie churwah कर आपके घर काम में हाथ बताने के लिए तो नही लाती ? अगर ऐसा है तो परही चुराने का कारण जानने की कोशिश करिएँ, और यथा सम्भव अपने काम करने वाली को समझिए की यही बच्ची कमसे कम मेट्रिक की परीक्षा पास करके और vocational training लेकर इतनी स्वावलंबी बुन सकते है की तुम्हे घर घर काम करने से छुटकारा मिल जाएगा।


ऐसे ही आप और लार्कियों का पता भी लगा सकतें हैं जप आर्थिक तंगी या और कारण से parhai में picharr जातीँ हैं और टूशन के लिए पैसे नही दे पाती, ऐसी लार्कियों के लिए आप अपनी society के लोगों के सहयोग से उनकी मदद भी कर सकतें हैं। आप निश्चय ही parhen लिखें हैं. घर का कोई सदस्य भी अपने समयसे सपता में २, ३ दिन आधा घंटा निकल कर ऐसे लार्कियों की मदद कर सकता है।


अच्छा तो यह होगा किआपकी सोसाइटी कि महिलाएं ३, ४ का ग्रुप बना कर ऐसे लार्कियों की मदद करे ताकि वेह कम से कम मेट्रिक की परीक्षा तो पास कर ही लें। ऐसे कार्य के लिए एक स्थान फिक्स कर के ८, १० लार्कियों को साथ समय दे सकतें हैं। अपमे के महिलाएं विभिन् शेत्रों में निपुणता रखतें होंगे- जैसे पेंटिंग, स्केत्चिंग, कांदले मकिंग, कैरी बग्स बनाना, ग्रीटिंग कार्ड्स बनाना, कुकिंग , डांसिंग, सिंगिंग, एक्टिंग आदि। आप एन लार्कियों के लिए सप्ताह में २-३ दिन समय निकालके इन्हे vocational training दे सकते हैं। इसके लिए भी आप ४-५ लोगों का ग्रुप बना के कार्य आरम्भ कर सकतें हैं।

शुरू शुरू में आपको यह थोरा अटपटा व् मुश्किल लगेगा, लेकिन देखियेगा धीरे धीरे आपको एस कार्य में कितना अनद आने लगेगा। और कौन जाने किस दिन भारत की महिलाओं मैंआपके द्वारा प्ररित की हुए किसी एक महिला का भी नाम हो।


इरादे मजबूत हो तो कुछ भी मुश्किल नही। तो आज ही सunkulp ली जिए।
HSO ने जो २५ ड्राप आउट गिर्ल्स को मेट्रिक परीक्षा पास करवाने और वोकेशनल ट्रेनिंग देने का जो सामाजिक कदम उठाया है- उसमे आप अपना शत प्रति शत
योगदान देंगे और संकल्प लीजिये parhai लिकाही के आभाव से कोई महिला किस्सी भी प्रकार के सामाजिक शोषण का शिकार न हो। जरा सोचिये?

- लेखिका : प्रोमिला सरस्वती
website - http://www.helpsocial.org/

Sunday, April 26, 2009

I met my reflection

I met my reflection
walking through the terrain
my folks wont believe it
nor would my friends
but i felt it touch my hand
and guide me down the way
where it had made its own path
it hummed into my ear
a virgin tune
and took me far
and brought me to a paradise
and when i looked around
the reflection was no more in sight
i screamed and cried
but no one was there
for its mission ws over
and mine had begun
to follow the path to paradise
or to dapart and resign

-Shailja Vohra